“अहिंसा ही परम धर्म है”

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अहिंसा ही परम धर्म है

 

मानव जीव अति दुर्लभ है । पुण्य कर्मों से हमें यह मानव जीवन प्राप्त हुआ है इस मनुष्य जीवन का सदुपयोग करते हुए मानव जीवन में अपने भीतर सदा सेवा भावना रखनी चाहिए । भगवान महावीर ने जिओ और जीने दोका जो अहिंसा का पाठ हमें पढ़ाया है । अहिंसा ही हमारा परम धर्म है । उसके अनुरूप हम अपना कार्य करते रहें। मानव के साथ ही सभी जीवों की रक्षासुरक्षा करना और उनको जीने देना हम सबका दायित्व है। यदि इसमें हम सफल होते हैं तभी यह नारा सार्थक होगा ।

 

पशु-पक्षीजीव-जंतु सभी मनुष्य के सद्भाव के कारण ही जीवित हैं अन्यथा उनका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता । प्राणी मूक वेदना से अपनी सुरक्षा की याचना करते हैं। हमें भी चाहिए कि उनके संरक्षण के लिए सभी सदैव प्रयत्नशीलसतर्कजागरुक और तत्पर रहे ।

 

इस आधुनिक युग में हमें संभलकर चलना है और युवा पीढ़ी को हमारे धर्म और संस्कारों से जोड़कर उन्हें अहिंसा का पाठ पढ़ाना है ताकि वे भी अपने जीवन में अच्छे कार्य की ओर आगे बढ़ सकें। प्राणियों और सभी जीवों की रक्षा कर सके ।

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